प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को शनिवार दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से हटाकर वीएमएमसी (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। वांगचुक अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन पर थे, जिसके माध्यम से वे नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में व्यापक अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश
यह कार्रवाई दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया कर रहे थे, के निर्देश पर की गई। अदालत ने कार्यकर्ता के स्वास्थ्य से संबंधित एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कहा कि "हर नागरिक का जीवन कीमती है" और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उनके चिकित्सा कल्याण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
पुलिस उपायुक्त (नई दिल्ली) सचिन शर्मा ने कहा कि पुलिस ने उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए और उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह पर यह कदम उठाया है।
पुलिस बल ने जंतर-मंतर क्षेत्र को घेरा और एहतियात बरतते हुए 59 वर्षीय कार्यकर्ता को वहां से स्थानांतरित किया। शुक्रवार को जारी मेडिकल अपडेट के अनुसार, वांगचुक के स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट आई थी, जिसमें वजन कम होना और चिंताजनक वाइटल्स शामिल थे।
संसद मार्च की योजना
सोनम वांगचुक को उस समय हटाया गया जब वे 20 जुलाई को संसद तक एक बड़े 'संसद मार्च' की तैयारी कर रहे थे। यह मार्च मानसून सत्र के पहले दिन के लिए निर्धारित था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए बहुत ही गोपनीय और त्वरित तरीका अपनाया। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में आए, स्टेज पर चढ़ गए और वांगचुक सहित पूरे दृश्य को सफेद चादर से ढक दिया ताकि कोई भी घटना को कैमरे में रिकॉर्ड न कर सके। स दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को भी हिरासत में लिया गया। दिपके ने सोशल मीडिया (X) पर आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट की गई।विपक्ष का समर्थन
प्रदर्शन के दौरान इसे विभिन्न विपक्षी दलों का समर्थन मिला। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, किसान नेता राकेश टिकैत, समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव, और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने जंतर-मंतर जाकर अपना समर्थन व्यक्त किया था।